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वैदिक काल में हरियाणा का धार्मिक परिदृश्य | Ancient History of Haryana Notes Haryana GK -2026

By: admin 📅 July 14, 2026 ⏱️ 14 min read 👁️ 8 Views
वैदिक काल में हरियाणा का धार्मिक परिदृश्य
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Table of Contents / विषय सूची

वैदिक काल में हरियाणा का धार्मिक परिदृश्य (Ancient History of Haryana)

हरियाणा का इतिहास भारतीय सभ्यता के सबसे प्राचीन अध्यायों में से एक माना जाता है। वैदिक काल केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक विकास की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। इसी काल में आर्यों का आगमन, वेदों की रचना, पुरु वंश, कुरु वंश, महाभारत युद्ध, तथा भगवद्गीता के उपदेश जैसी ऐतिहासिक एवं धार्मिक घटनाएँ घटित हुईं, जिनका सीधा संबंध वर्तमान हरियाणा से जुड़ा हुआ है।

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे HSSC CET, HPSC (HCS), Haryana Police, HTET, Group C, Group D, Patwari, Canal Patwari, Clerk, Gram Sachiv तथा अन्य राज्य स्तरीय परीक्षाओं में इस विषय से प्रत्येक वर्ष प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इस अध्याय का गहन अध्ययन परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत आवश्यक है।

Quick Revision:
वैदिक काल में हरियाणा को आर्य संस्कृति का प्रमुख केंद्र माना जाता था। कुरुक्षेत्र क्षेत्र में महाभारत युद्ध हुआ तथा ज्योतिसर में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया। यही कारण है कि हरियाणा को भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक इतिहास का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।


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वैदिक सभ्यता क्या थी?

वैदिक सभ्यता भारतीय इतिहास की एक महत्वपूर्ण सभ्यता है, जिसका आधार वेद हैं। इसे हिन्दू धर्म की प्रारंभिक आधारशिला माना जाता है। इस सभ्यता का विकास मुख्यतः आर्यों के आगमन के बाद हुआ। प्रारंभिक वैदिक समाज कृषि एवं पशुपालन पर आधारित था, इसलिए इसे ग्रामीण सभ्यता भी कहा जाता है।

इस काल में धार्मिक जीवन अत्यंत सरल था। लोग प्राकृतिक शक्तियों जैसे अग्नि, इन्द्र, वरुण, सूर्य, सोम और वायु की पूजा करते थे। यज्ञ, हवन तथा वैदिक मंत्र धार्मिक जीवन का प्रमुख आधार थे।

वैदिक सभ्यता की प्रमुख विशेषताएँ

विषय विवरण
सभ्यता वैदिक सभ्यता
प्रमुख समुदाय आर्य
भाषा संस्कृत
प्रमुख ग्रंथ चार वेद
मुख्य व्यवसाय कृषि एवं पशुपालन
प्रमुख धर्म वैदिक धर्म
धार्मिक आधार यज्ञ एवं वैदिक मंत्र

हरियाणा में आर्यों का आगमन

इतिहासकारों के अनुसार हरियाणा उत्तर भारत का वह क्षेत्र था जहाँ आर्यों ने प्रारंभिक समय में अपना स्थायी निवास स्थापित किया। यहाँ की उपजाऊ भूमि, नदियाँ तथा अनुकूल जलवायु ने इस क्षेत्र को वैदिक संस्कृति के विकास का प्रमुख केंद्र बना दिया।

हरियाणा में बसने वाले प्रारंभिक आर्य अनेक जनजातियों में विभाजित थे, जिनमें पुरु, भरत, कुरु, पांचाल आदि प्रमुख थे।

इसी क्षेत्र में आगे चलकर महाभारत जैसी ऐतिहासिक घटना घटित हुई, जिसने हरियाणा को धार्मिक एवं सांस्कृतिक दृष्टि से अमर बना दिया।


परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

✔ हरियाणा वैदिक सभ्यता का प्रमुख केंद्र था।
✔ आर्यों ने सबसे पहले उत्तर भारत के उपजाऊ क्षेत्रों में निवास किया।
✔ प्रारंभिक वैदिक समाज ग्रामीण एवं कृषि प्रधान था।
✔ संस्कृत वैदिक काल की प्रमुख भाषा थी।


~ यहाँ "हरप्पा सभ्यता काल में हरियाणा का इतिहास" का Internal Link जोड़ें


पुरु वंश (Puru Dynasty)

हरियाणा के वैदिक इतिहास में पुरु वंश का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। माना जाता है कि प्रारंभिक आर्य समाज का प्रमुख शासन इसी वंश के अधीन था।

पुरु वंश का संस्थापक

पौराणिक परंपराओं के अनुसार मनु के प्रपौत्र पुरु को इस वंश का संस्थापक माना जाता है।

आगे चलकर इसी वंश में सम्राट भरत का जन्म हुआ, जिनके नाम पर हमारे देश का नाम भारत पड़ा।

यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कई बार पूछा जा चुका है।


सम्राट भरत

सम्राट भरत भारतीय इतिहास के महान शासकों में गिने जाते हैं। उनके शासनकाल में राज्य का विस्तार हुआ तथा आर्य संस्कृति का व्यापक विकास हुआ।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत का नाम सम्राट भरत के नाम पर पड़ा।
  • भरत पुरु वंश के महान शासक थे।
  • वैदिक संस्कृति के विस्तार में उनका महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

दाशराज्ञ युद्ध (Battle of Ten Kings)

वैदिक इतिहास की सबसे प्रसिद्ध घटनाओं में दाशराज्ञ युद्ध का उल्लेख मिलता है।

यह युद्ध राजा सुदास तथा दस राजाओं के संघ के बीच लड़ा गया।

इस युद्ध का उल्लेख ऋग्वेद में मिलता है।

युद्ध से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

विषय विवरण
युद्ध दाशराज्ञ युद्ध
विजेता राजा सुदास
स्थान रावी नदी के तट
पुरोहित (सुदास) महर्षि वशिष्ठ
विरोधी संघ का पुरोहित महर्षि विश्वामित्र

राजा सुदास की विजय के बाद पुरु वंश की शक्ति और अधिक बढ़ी तथा आर्य समाज में उसका प्रभाव स्थापित हुआ।

परीक्षा हेतु याद रखें

दाशराज्ञ युद्ध = राजा सुदास + रावी नदी + वशिष्ठ + विश्वामित्र

यह संयोजन HSSC एवं HCS परीक्षाओं में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

पुरु वंश का अंतिम शासक

पुरु वंश का अंतिम प्रमुख शासक संवरण माना जाता है।

संवरण के समय पुरु वंश और पांचाल वंश के बीच राजनीतिक एवं वैवाहिक संबंध स्थापित हुए।

इसी संधि के परिणामस्वरूप आगे चलकर कुरु वंश का उदय हुआ, जिसने हरियाणा के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा।

कुरु वंश का उदय

पुरु एवं पांचाल वंशों के मेल से उत्पन्न कुरु वंश वैदिक काल का सबसे प्रभावशाली राजवंश माना जाता है।

हरियाणा का अधिकांश भाग इसी वंश के अधीन था।

कुरु वंश ने धार्मिक, सामाजिक तथा राजनीतिक जीवन को संगठित स्वरूप प्रदान किया।

कुरु वंश की राजधानी

कुरु वंश की राजधानी इंद्रप्रस्थ मानी जाती है।

हालाँकि कुरुक्षेत्र इस वंश का प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र था।

यहीं से वैदिक संस्कृति का व्यापक प्रसार हुआ।

कुरु वंश के प्रमुख तथ्य
राजधानी इंद्रप्रस्थ
प्रमुख क्षेत्र कुरुक्षेत्र
धार्मिक महत्व भगवद्गीता का उपदेश
ऐतिहासिक महत्व महाभारत युद्ध

महाभारत युद्ध और हरियाणा

महाभारत केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि भारतीय संस्कृति, धर्म और दर्शन का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है।

यह युद्ध कौरवों और पांडवों के बीच कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर लड़ा गया।

महाभारत युद्ध 18 दिनों तक चला और अंततः पांडवों की विजय हुई।

आज भी कुरुक्षेत्र को विश्वभर में धर्मक्षेत्र के रूप में जाना जाता है।

ज्योतिसर में श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश

महाभारत युद्ध प्रारंभ होने से पहले अर्जुन अपने ही संबंधियों के विरुद्ध युद्ध करने को लेकर संशय में पड़ गए।

तब भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में अर्जुन को कर्म, धर्म और जीवन के गूढ़ सिद्धांतों का उपदेश दिया, जिसे आज श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से जाना जाता है।

यह स्थान आज भी हरियाणा का प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल है।

परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण

✅ महाभारत युद्ध – कुरुक्षेत्र

✅ अवधि – 18 दिन

✅ विजय – पांडव

✅ गीता का उपदेश – ज्योतिसर (कुरुक्षेत्र)


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ExamDisha Quick Revision

प्रश्न उत्तर
वैदिक सभ्यता किससे जुड़ी है? आर्य संस्कृति
वैदिक काल की भाषा संस्कृत
भारत का नाम किसके नाम पर पड़ा? सम्राट भरत
दाशराज्ञ युद्ध किसके बीच हुआ? राजा सुदास एवं दस राजाओं का संघ
दाशराज्ञ युद्ध कहाँ हुआ? रावी नदी
पुरु वंश का अंतिम शासक संवरण
कुरु वंश की राजधानी इंद्रप्रस्थ
महाभारत युद्ध कहाँ हुआ? कुरुक्षेत्र
गीता का उपदेश कहाँ दिया गया? ज्योतिसर

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कुरु वंश से जुड़े धार्मिक एवं ऐतिहासिक साक्ष्य

वैदिक काल में हरियाणा का अधिकांश भाग कुरु राज्य के अंतर्गत आता था। यही कारण है कि अनेक वैदिक, ब्राह्मण एवं पौराणिक ग्रंथों में इस क्षेत्र का उल्लेख विशेष महत्व के साथ मिलता है। इन ग्रंथों से यह स्पष्ट होता है कि हरियाणा उस समय धार्मिक अनुष्ठानों, यज्ञों, वैदिक शिक्षा और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।

प्रतियोगी परीक्षाओं में इन ग्रंथों से जुड़े प्रश्न बार-बार पूछे जाते हैं।

पंचविंश ब्राह्मण में हरियाणा

पंचविंश ब्राह्मण में वर्तमान हरियाणा क्षेत्र को “ब्रह्मवेदी” कहा गया है।

“ब्रह्मवेदी” का अर्थ है—वह पवित्र भूमि जहाँ वैदिक यज्ञ, धार्मिक अनुष्ठान और आध्यात्मिक साधना का विशेष महत्व हो।

यह उल्लेख हरियाणा को वैदिक संस्कृति के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करता है।

शतपथ ब्राह्मण एवं ऐतरेय ब्राह्मण

शतपथ ब्राह्मण तथा ऐतरेय ब्राह्मण में हरियाणा क्षेत्र को “कुरु-प्रदेश” कहा गया है।

इन ग्रंथों के अनुसार कुरु राज्य वैदिक धर्म, यज्ञ परंपरा तथा ब्राह्मण संस्कृति का महत्वपूर्ण केंद्र था।

परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण तथ्य

ग्रंथ हरियाणा का उल्लेख
पंचविंश ब्राह्मण ब्रह्मवेदी
शतपथ ब्राह्मण कुरु-प्रदेश
ऐतरेय ब्राह्मण कुरु-प्रदेश

महाभारत एवं वामन पुराण में हरियाणा

महाभारत तथा वामन पुराण में कुरुक्षेत्र को “धरती का युद्धस्थल” (धर्मक्षेत्र) कहा गया है।

यही वह पवित्र भूमि है जहाँ धर्म और अधर्म के बीच महाभारत का युद्ध हुआ तथा श्रीकृष्ण ने गीता का दिव्य संदेश दिया।

आज भी कुरुक्षेत्र को विश्वभर में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक अध्ययन का प्रमुख केंद्र माना जाता है।


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वैदिक काल के प्रमुख यक्ष

महाभारत एवं वामन पुराण में हरियाणा के दो प्रमुख यक्षों का उल्लेख मिलता है।

1. कपिल यक्ष

  • स्थान – जींद
  • वर्तमान नाम – रामहृदय तीर्थ

2. तरन्तुक यक्ष

  • स्थान – हाट गाँव (जींद)

दोनों यक्षों का संबंध दृष्टद्वती (दृषद्वती) नदी के तट से माना जाता है।

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण

यक्ष स्थान
कपिल यक्ष जींद
तरन्तुक यक्ष हाट गाँव (जींद)

महाभारत में रोहतक एवं सिरसा का उल्लेख

महाभारत के नकुल दिग्विजय प्रसंग में वर्तमान हरियाणा के अनेक क्षेत्रों का उल्लेख मिलता है।

इसके अनुसार—

  • रोहतिका = वर्तमान रोहतक
  • सरिस्का = वर्तमान सिरसा

यह विवरण दर्शाता है कि महाभारत काल में हरियाणा का क्षेत्र राजनीतिक एवं सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण था।

बहुधान्यक प्रदेश

महाभारत काल में हरियाणा को “बहुधान्यक प्रदेश” कहा जाता था।

इस नाम का अर्थ है—

अत्यधिक अन्न उत्पादन करने वाला प्रदेश।

यह नाम उस समय हरियाणा की उपजाऊ भूमि तथा कृषि प्रधान अर्थव्यवस्था को दर्शाता है।

राजा परीक्षित एवं असंध

महाभारत युद्ध के बाद अभिमन्यु के पुत्र राजा परीक्षित कुरु राज्य के शासक बने।

कुछ परंपरागत विवरणों के अनुसार उन्होंने असंध (वर्तमान करनाल क्षेत्र) को अपनी राजधानी बनाया।

वैदिक साहित्य में परीक्षित को एक प्रभावशाली शासक के रूप में वर्णित किया गया है। हालांकि विभिन्न ग्रंथों में उनकी राजधानी और शासन से संबंधित विवरणों में मतभेद भी मिलते हैं, इसलिए परीक्षा में प्रचलित हरियाणा GK स्रोतों के अनुसार तैयारी करें।

राजा जनमेजय एवं सर्प यज्ञ

राजा परीक्षित के बाद उनके पुत्र जनमेजय शासक बने।

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा परीक्षित की मृत्यु सर्पदंश से हुई थी। अपने पिता की मृत्यु का प्रतिशोध लेने के लिए जनमेजय ने सर्प यज्ञ कराया।

हरियाणा GK के प्रचलित स्रोतों में इस यज्ञ का संबंध सफीदों (जींद) से जोड़ा जाता है।

यह तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछा जाता है।

जनमेजय के बाद

कुछ पारंपरिक हरियाणा GK पुस्तकों के अनुसार—

  • जनमेजय का ब्राह्मणों से संघर्ष हुआ।
  • युद्ध में उनकी मृत्यु हुई।
  • उनके बाद शतानीक (शतानीक/सप्तनिक) शासक बने।
  • तक्षशिला को राजधानी बनाने का उल्लेख कुछ परंपराओं में मिलता है।

महत्वपूर्ण नोट: इस विषय में विभिन्न पौराणिक एवं ऐतिहासिक स्रोतों में मतभेद पाए जाते हैं। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते समय अपने आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं मानक अध्ययन सामग्री को प्राथमिकता दें।


~ यहाँ "महाभारत काल से जुड़े हरियाणा GK Questions" का Internal Link जोड़ें


वैदिक काल के पुरातात्त्विक साक्ष्य

हरियाणा में वैदिक एवं उत्तरवैदिक काल से जुड़े अनेक पुरातात्त्विक स्थल प्राप्त हुए हैं।

इनमें प्रमुख हैं—

  • राजा कर्ण का किला (थानेसर)
  • सुध (यमुनानगर)
  • दौलतपुर (कुरुक्षेत्र)

इन स्थलों से प्राप्त अवशेष वैदिक एवं महाभारत कालीन संस्कृति के अध्ययन में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

कुरु जंगल

प्राचीन काल में कुरु राज्य का विस्तार वर्तमान कुरुक्षेत्र सहित आसपास के क्षेत्रों तक था।

इस विस्तृत भूभाग को “कुरु जंगल” कहा जाता था।

यह क्षेत्र वैदिक धर्म, यज्ञ, आश्रम व्यवस्था तथा गुरुकुल शिक्षा का प्रमुख केंद्र था।

रामायण एवं महाभारत का काल

धार्मिक मान्यता के अनुसार—

  • त्रेतायुग में रामायण की घटनाएँ हुईं।
  • द्वापर युग में महाभारत का युद्ध हुआ।

कुछ आधुनिक वैज्ञानिक एवं पुरातात्त्विक शोध (जैसे कार्बन डेटिंग) विभिन्न समय-निर्धारण प्रस्तुत करते हैं, लेकिन इन पर अभी भी विद्वानों के बीच पूर्ण सहमति नहीं है।

परीक्षा नोट: प्रतियोगी परीक्षाओं में सामान्यतः धार्मिक एवं पारंपरिक क्रम (त्रेता → रामायण, द्वापर → महाभारत) ही पूछा जाता है।


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वैदिक काल के अन्य महत्वपूर्ण तथ्य

वेदों की भाषा

चारों वेदों की भाषा संस्कृत है।

संस्कृत भाषा अपेक्षाकृत कठिन होने के कारण वेदों की व्याख्या के लिए ब्राह्मण ग्रंथों की रचना की गई।

वेद एवं संबंधित ब्राह्मण ग्रंथ

वेद प्रमुख ब्राह्मण ग्रंथ
ऋग्वेद ऐतरेय ब्राह्मण, कौषीतकि ब्राह्मण
यजुर्वेद शतपथ ब्राह्मण, तैत्तिरीय ब्राह्मण
सामवेद पंचविंश ब्राह्मण
अथर्ववेद गोपथ ब्राह्मण

उपनिषद

उपनिषद का शाब्दिक अर्थ है—

गुरु के समीप बैठकर प्राप्त किया गया ज्ञान।

उपनिषद भारतीय दर्शन की अमूल्य धरोहर हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य

“सत्यमेव जयते” वाक्य मुण्डक उपनिषद से लिया गया है।

यह भारत गणराज्य का राष्ट्रीय आदर्श वाक्य भी है।

पृथुदक तीर्थ

हरियाणा का प्रसिद्ध पृथुदक तीर्थ (वर्तमान पिहोवा) ब्रह्मा तथा महाराजा पृथु से जुड़ा हुआ माना जाता है।

यह स्थल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और आज भी श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है।

ExamDisha Quick Revision Table

प्रश्न उत्तर
पंचविंश ब्राह्मण में हरियाणा ब्रह्मवेदी
शतपथ एवं ऐतरेय ब्राह्मण कुरु-प्रदेश
कपिल यक्ष जींद
तरन्तुक यक्ष हाट गाँव (जींद)
बहुधान्यक प्रदेश महाभारत कालीन हरियाणा
परीक्षित की प्रचलित राजधानी असंध
जनमेजय का प्रसिद्ध यज्ञ सर्प यज्ञ
वेदों की भाषा संस्कृत
सत्यमेव जयते मुण्डक उपनिषद
गुरु के समीप प्राप्त ज्ञान उपनिषद

Previous Year Exam Oriented Questions

प्रश्न 1. पंचविंश ब्राह्मण में हरियाणा को किस नाम से संबोधित किया गया है?

उत्तर: ब्रह्मवेदी

प्रश्न 2. गीता का उपदेश कहाँ दिया गया?

उत्तर: ज्योतिसर (कुरुक्षेत्र)

प्रश्न 3. “सत्यमेव जयते” किस उपनिषद से लिया गया है?

उत्तर: मुण्डक उपनिषद

प्रश्न 4. बहुधान्यक प्रदेश किसे कहा जाता था?

उत्तर: महाभारत कालीन हरियाणा

Practice MCQs

1. पंचविंश ब्राह्मण में हरियाणा को किस नाम से संबोधित किया गया है?

(A) ब्रह्मर्षि देश
(B) कुरु प्रदेश
(C) ब्रह्मवेदी
(D) आर्यावर्त

उत्तर: (C)

2. शतपथ ब्राह्मण में हरियाणा का कौन-सा नाम मिलता है?

(A) कुरु प्रदेश
(B) ब्रह्मवेदी
(C) पृथुदक
(D) बहुधान्यक

उत्तर: (A)

3. “सत्यमेव जयते” किस उपनिषद से लिया गया है?

(A) ईश
(B) कठ
(C) मुण्डक
(D) छांदोग्य

उत्तर: (C)

4. जनमेजय ने कौन-सा यज्ञ कराया था?

(A) राजसूय यज्ञ
(B) अश्वमेध यज्ञ
(C) सर्प यज्ञ
(D) वाजपेय यज्ञ

उत्तर: (C)

5. वैदिक काल में वेदों की भाषा क्या थी?

(A) पालि
(B) प्राकृत
(C) संस्कृत
(D) अपभ्रंश

उत्तर: (C)

निष्कर्ष

वैदिक काल हरियाणा के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है। इसी काल में आर्य संस्कृति का विकास हुआ, कुरु राज्य का उत्कर्ष हुआ तथा महाभारत जैसी ऐतिहासिक घटना घटी। कुरुक्षेत्र, ज्योतिसर, असंध, जींद, थानेसर और पिहोवा जैसे स्थान आज भी इस गौरवशाली विरासत के जीवंत प्रमाण हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से पुरु वंश, कुरु वंश, दाशराज्ञ युद्ध, महाभारत, पंचविंश ब्राह्मण, शतपथ ब्राह्मण, वेद, उपनिषद और जनमेजय का सर्प यज्ञ जैसे विषय अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

महत्वपूर्ण अस्वीकरण (Disclaimer)

यह लेख “वैदिक काल में हरियाणा का धार्मिक परिदृश्य (Ancient History of Haryana)” विषय को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी विभिन्न मानक इतिहास पुस्तकों, हरियाणा सामान्य ज्ञान (Haryana GK) स्रोतों, वैदिक एवं पौराणिक ग्रंथों तथा प्रचलित परीक्षा सामग्री के आधार पर सरल भाषा में प्रस्तुत की गई है। कुछ विषय, जैसे परीक्षित की राजधानी, जनमेजय के उत्तराधिकारी अथवा महाभारत काल की तिथियाँ, विभिन्न ऐतिहासिक एवं पौराणिक स्रोतों में भिन्न-भिन्न रूप में वर्णित मिलती हैं। ऐसे मामलों में अभ्यर्थियों को अपने परीक्षा बोर्ड द्वारा निर्धारित आधिकारिक पाठ्यक्रम एवं प्रमाणिक अध्ययन सामग्री को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि इस लेख में कोई तथ्यात्मक त्रुटि दिखाई दे, तो हमें अवश्य सूचित करें ताकि आवश्यक संशोधन किया जा सके।

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